माहुल (आजमगढ़)। अहरौला क्षेत्र के मेहियापार में चल रही आनंद रामायण राम कथा के छठवें दिन कथावाचक पंडित कौशल किशोर जी महाराज ने राम के वन गमन के वृतांत को जीवंत सुनाया। जिसे सुन श्रद्धालुओं की आंखों से अश्रुधारा बह निकली और वे भाव विभोर हो गए कथा सुनाते हुए पंडित कौशल किशोर जी महाराज ने कहा कि भगवान राम ने सहस्र वर्षों से दर्शन के निमित्त जंगल पहाड़ों और समुद्र की सीमा में तप करते हुए ऋषि मुनियों को दर्शन देने और उनको दुष्टों से संरक्षित करने के लिए स्वयं वन गए। भगवान राम का जन्म ही सृष्टि पर संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए हुआ।उन्होंने आनंद रामायण में वर्णित कथा का जिक्र करते हुए कहा कि भक्ति में वो ताकत है कि राज महलों में रहने वाले और महाराजा दशरथ के पुत्र राम को ऋषि मुनियों की रक्षा के लिए वन जाने को मजबूर कर दिया और उन्होंने पिता द्वारा मां कैकेई को दिए हुए वचन का पालन करने के लिए भोग विलास को त्याग कर नंगे पैर अयोध्या छोड़ कर निकल गए और धर्म और संस्कृति की रक्षा करने के साथ ही साथ पूरी धरती से राक्षसी प्रवृत्ति का नाश कर दिया। पंडित कौशल किशोर जी महाराज ने कथा का मर्म सुनाते हुए कहा कि राम के इन्हीं सब गुणों ने उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम बनाया आज भी यदि उनके आदर्श को मनुष्य अपने जीवन में उतार ले तो उत्तम पुरुष बन सकता है। कथा को सुनने के लिए पांडाल खचाखच भरा था दिन में दो बजे से शाम छः बजे तक श्रद्धालुओं से भरे पांडाल में राम के जयकारे गूंजते रहे।।
