अतरौलिया आजमगढ़ स्थानीय नगर पंचायत क्षेत्र चिस्ती पुर स्थित प्राचीन कैलेश्वर धाम (कैली) मंदिर परिसर में अखंड हरी कीर्तन के समापन अवसर पर भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। कार्यक्रम के दौरान संत समाज की गरिमामयी उपस्थिति में मंदिर के शिष्य दिलीप दास को विधिवत तिलक कर मंदिर का महंत घोषित किया गया। इससे पूर्व वे मंदिर के पुजारी के रूप में सेवाएं दे रहे थे। संतों के आशीर्वाद और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महंत पद की घोषणा होते ही परिसर “हर-हर महादेव” के उद्घोष से गूंज उठा। ज्ञात हो कि कैलेश्वर धाम एक द्वापर युगीन प्राचीन मंदिर है, जहां स्वयंभू शिवलिंग की पूजा-अर्चना की जाती है। यहां गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन पीढ़ियों से होता आ रहा है, जिसे मंदिर के महंत आगे बढ़ाते रहे हैं। इसी परंपरा के अंतर्गत वर्तमान 18वें गुरु श्रीकांत जी महाराज ने अपनी अवस्था और व्यवस्था को देखते हुए अपने परम शिष्य दिलीप दास को महंत पद का दायित्व सौंपा। महंत घोषित किए जाने के बाद दिलीप दास ने कहा कि यह सब उनके गुरु की कृपा और संत समाज के आशीर्वाद का परिणाम है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में विभिन्न मठों से साधु-संतों का आगमन हुआ और सभी ने उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने यह भी बताया कि वे वैष्णव परंपरा के उपासक हैं और मंदिर की सेवा परंपरागत रीति से आगे बढ़ाई जाएगी। भक्त जितेंद्र सोनी ने बताया कि कैलेश्वर धाम क्षेत्र की एक प्रमुख तपोस्थली है, जहां वर्षों से साधु-संत तपस्या करते आए हैं। उन्होंने कहा कि यह विशाल भंडारा श्रीकांत जी महाराज द्वारा अपने गुरु जगत दास जी महाराज की स्मृति में आयोजित किया गया, जिन्होंने यहां कठोर तपस्या की थी। भंडारा देर रात तक निरंतर चलता रहेगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा।
