लालगंज (आजमगढ़) स्थानीय नगर में स्थित पुराना सरकारी अस्पताल पिछले 40 वर्षों से बदहाली के आंसू रो रहा है। लगभग 40 वर्ष पूर्व जब टिकरगाढ़ में नया सीएचसी/पीएचसी अस्पताल बन गया, तब से इस पुराने अस्पताल के भवन और पूरे परिसर को विभाग ने भगवान भरोसे छोड़ दिया है।परिसर में झाड़ियों और कूड़े-कचरे का ढेर लगा है। सफाई के अभाव में संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने अस्पताल परिसर को स्टैंड बना दिया है।चार पहिया ,टैम्पो, बाइक और ठेले हमेशा खड़े रहते है। सबसे बड़ी समस्या सुअरों की है। दर्जनों सुअर दिन-रात परिसर में डेरा डाले रहते हैं। उनकी गंदगी और बदबू से आसपास के मोहल्लेवासियों का जीना मुहाल हो गया है। शाम होते ही बदबू से उठना-बैठना मुश्किल हो जाता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विभाग की इस भवन में कोई रुचि नहीं है। अगर शासन-प्रशासन चाहे तो इस भवन और परिसर को किसी अन्य विभाग को आवंटित कर दे जिससे इसका कायाकल्प हो सके। इससे सरकारी संपत्ति का सदुपयोग भी होगा और कस्बे को गंदगी से मुक्ति भी मिलेगी।नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस लावारिस पड़े अस्पताल भवन का निरीक्षण कर उचित कार्रवाई की जाए।
