दिन भर चली मजलिसे हुई तकरीरें और किया गया मातम,
माहुल(आजमगढ़)। अंजुमन-ए-सज्जादिया, माहुल के तत्वावधान में सोमवारी बाजार से हजरत इमाम हुसैन की याद में मंगलवार को 97 वें चेहलुम का जुलूस निकाला गया। इस दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने खिराजे अकीदत पेश किया। सुरक्षा की दृष्टि से भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रही। नगर पंचायत माहुल में मंगलवार को हजरत इमाम हुसैन की याद में 97वें चेहलुम का आयोजन किया गया। चेहलुम का जुलूस सुबह नमाज-ए-फज्र के बाद निकाला गया। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार यह कार्यक्रम 6 सफर 1448 हिजरी के अवसर पर आयोजित किया गया। अंजुमन-ए-सज्जादिया, माहुल में आयोजित किये गए इस धार्मिक कार्यक्रम में क्षेत्र के बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। जुलूस के साथ अलम-ए-मुबारक, ज़ुलजनाह और अमारी मौजूद रहे, जिनकी अकीदतमंदों ने ज़ियारत की। इस दौरान लोगों ने हज़रत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए उन्हें ख़िराज-ए-अकीदत पेश किया और ग़म में उनकी आँखें नम हो गईं। जुलूस नगर के सोमवारी बाजार से निकलकर इमामबाड़ा होते हुए रौजा पर समाप्त हुआ। मौलाना मिर्जा यासूब अब्बास, वसी हसन खान, सैयद कैसर हुसैन रिजवी ने कहा कि इस्लाम इंसानियत का नाम है। हजरत इमाम हुसैन, पैगंबर हजरत मुहम्मद के नवासे, हजरत अली और बीबी फातिमा के पुत्र थे। उन्हें इस्लाम में सत्य, इंसाफ और जुल्म के खिलाफ लड़ने के प्रतीक के रूप में माना जाता है। उन्होंने साल 680 में कर्बला की जंग में यज़ीद की तानाशाही के सामने झुकने से इनकार कर दिया था और अपने परिवार तथा साथियों की कुर्बानी दी थी। 10 मुहर्रम (आशुरा का दिन) को कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों को यज़ीद की विशाल सेना द्वारा शहीद कर दिया गया था। उनके परिवार के सदस्यों को भी भूखा-प्यासा रखा गया और मार डाला गया। जुलूस देर शाम कस्बा के रौजा पर समाप्त हुआ। जुलूस में रौनके इस्लाम, मुबारकपुर, हुसैनियत मिशन,लालपुर अंबेडकर नगर, सज्जादिया मिशन, माहुल, दादा ए मंज़िले ए आमा, घोसी मऊ, सिपाहे हुसैनी, बनौली सुल्तानपुर पंजतनवी, गुलामपुर सुल्तानपुर शामिल हुए। इस मौके पर सेठ इरशाद आलवी, मिर्ज़ा यासूब अब्बास,वसी हसन खान,सेठ कैसर हुसैन रिज़वी,नगी कैफान रज़ा,नायाब हैदर,जीशान इंजीनियर,फरहान, सकलैन, जफर, नजम मेंहदी, सैफी, वसी हसन,सेठ यूनुस हैदर, जीशान हैदर खान चल रहे थे।।
