माहुल(आजमगढ़)। जिले में झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा मरीजों के शोषण और जान लेने का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा। ताजा मामला अहरौला थाना क्षेत्र के गनवारा में एक नर्सिंग होम के संचालक ने एक महिला को भर्ती कर आपरेशन कर शोषण किया। एक सप्ताह भर्ती करने के बाद जब महिला की हालत सुधरने के बजाय बिगड़ने लगी तो स्वजन उसे लेकर प्रयागराज में भर्ती कराया तब महिला की जान बची। इस संबंध में उसके पुत्र सत्येंद्र गिरी ने मंगलवार को अहरौला पुलिस के साथ ही साथ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को शिकायती पत्र देकर कार्यवाही की मांग की है। इस दौरान दिए गए शिकायती पत्र में सत्येंद्र गिरी का कहना है कि वह अम्बेडकर नगर जिले के कटका थाना क्षेत्र के चकिया गोसाई का पूरा गांव का रहने वाला है। छः अप्रैल को वह अपनी 55 वर्षीय माता नीलम गिरी को लेकर गनवारा के संजीवनी मेडिकल स्टोर एवं नर्सिंग होम पर आया। वहां आने के बाद नर्सिंग होम की संचालिका आशा यादव ने खून जॉच और अल्ट्रासाउंड करवाया।रिपोर्ट देखने के बाद उन्होंने यह कहा कि इन्हें भर्ती कराना होगा । आपरेशन करके गर्भाशय निकालना ही एक मात्र विकल्प है। इसमें 20हजार रूपये लगेगे।सतेंद्र ने आरोप लगाया कि उसने अपनी मां को संजीवनी नर्सिंग भर्ती करवाकर आशा यादव के पति आशीष यादव के बैंक खाते में पैसा भी भेज दिया। उसी दिन आपरेशन कर उनकी मां के गर्भाशय को निकाला गया। पर रक्त का रिसाव बंद नहीं हुआ और 10 दिन भर्ती रहने के बाद जब हालत सुधरने के बजाय बिगड़ने लगी और रक्त का रिसाव बंद नहीं हुआ तो आशा यादव ने जवाब दे दिया। किसी तरह से वह अपनी मां के सोने के जेवर बेचकर प्रयागराज ले जाकर वहां भर्ती कराया तब जा कर उसकी मां की जान बची। इसमें उसके डेढ़ लाख रुपए और खर्च हो गए। 26 अप्रैल को जब वह अपनी मां के ठीक होने के बाद जब संजीवनी अस्पताल गनवारा आया और उनसे पूछने लगा तो आशा यादव और उनके पति आशीष ने उसे उल्टे धमकी देने लगे। इस संबंध में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आलेंद्र कुमार का कहना है कि बिना पंजीकरण के अस्पताल चलाना गलत है अगर ऐसी घटना हुई है तो उक्त अस्पताल पर विधि सम्मत कार्यवाही होगी।।
