अतरौलिया आजमगढ़ महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर पूरे क्षेत्र तथा नगर के प्राचीन कैलेश्वर धाम मंदिर में रविवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा। भक्तों ने लंबी कतारों में खड़े होकर स्वयंभू शिवलिंग पर जलाभिषेक किया और बेलपत्र अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में महिलाओं और युवतियों की विशेष भागीदारी देखने को मिली। श्रद्धालु माथे पर चंदन-रोली का तिलक लगाकर भक्ति भाव में डूबे नजर आए। महाशिवरात्रि के अवसर पर शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल, बेलपत्र और धतूरा से विधिवत अभिषेक किया गया।
मंदिर के पुजारी महंत दिलीप दास ने बताया कि महाशिवरात्रि पर विधिपूर्वक पूजन और व्रत रखने से भगवान शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। उन्होंने बताया कि यह मंदिर प्राचीन काल से श्रद्धा का केंद्र रहा है। मंदिर परिसर में स्थित विशाल बरगद का वृक्ष द्वापर युग का माना जाता है और उसके समीप स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। यहां पीढ़ियों से साधु-संत तपस्या करते आए हैं। सेवादार जितेंद्र सोनी के अनुसार, महाशिवरात्रि पर सुबह से ही श्रद्धालु लगातार जलाभिषेक कर रहे हैं। मान्यता है कि यह स्थल पौराणिक महत्व का है, यहां ऋषि अत्रि और माता अनुसूईया ने तपस्या की थी। कहा जाता है कि इसी कारण इस क्षेत्र का नाम अतरौलिया पड़ा। उन्होंने बताया मंदिर का निर्माण लगभग तेरह सौ वर्ष पूर्व गुरचरन साहू द्वारा कराया गया था। निर्माण के दौरान आई बाधाओं के बाद पहले राम दरबार की स्थापना की गई, जिसके पश्चात मंदिर का कार्य पूर्ण हुआ। मंदिर की प्राचीन धूनी आज भी निरंतर प्रज्वलित है। महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था के लिए प्रशासन व पुलिस की ओर से विशेष प्रबंध किए गए। पूरे क्षेत्र में दोपहर तक जलाभिषेक का सिलसिला जारी रहा और श्रद्धालु शांतिपूर्वक दर्शन-पूजन करते रहे।
