धर्मग्रंथों में है 365 कुओं एवं 365 यज्ञ वेदियों का उल्लेख।
महराजगंज आजमगढ़ जिले के महराजगंज नगर पंचायत स्थित भैरवधाम में भैरवधाम विकास परियोजना के तहत चल रहे सुंदरीकरण एवं विकास कार्यों के दौरान दो प्राचीन कुएं सामने आने से क्षेत्र में श्रद्धा और कौतूहल का माहौल है। इन प्राचीन कुओं को देखने के लिए श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भीड़ जुट रही है। लोगों का मानना है कि इन कुओं का संबंध भैरवधाम के प्राचीन धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व से हो सकता है। धार्मिक मान्यताओं और उपलब्ध संदर्भों के अनुसार राजा दक्ष की नगरी रही इस स्थान पर उनके द्वारा कराए गए यज्ञ में माता पार्वती ने भगवान शिव के अनादर से क्रोधित हो इसी स्थान के यज्ञ शाला में कूदकर सती हुई थी जिससे क्षुब्ध होकर भगवान शिव ने क्रोधित हो भैरव की उत्पत्ति की और यज्ञ विध्वंस कर राजा दक्ष का मन मर्दन कर उन्हें दंडित किया था। इसी यज्ञ से संबंधित भैरवधाम में कुल 365 कुओं एवं 365 यज्ञ वेदियों का उल्लेख मिलता है। ऐसे में विकास कार्यों के दौरान दो प्राचीन जिंदा कुओं का सामने आना इस धाम के धार्मिक इतिहास को और अधिक महत्वपूर्ण बना रहा है। प्राचीन संरचना वाले इन कुओं को देखकर लोग इसे धाम की ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक परंपराओं से जोड़कर देख रहे हैं। भैरवधाम विकास परियोजना के अंतर्गत परिसर के सुंदरीकरण, श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार और धाम को व्यवस्थित एवं आकर्षक स्वरूप देने का कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में सामने आए इन प्राचीन कुओं ने परियोजना के साथ-साथ धाम के इतिहास को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भैरवधाम सदियों से श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां देश-प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। अब प्राचीन कुओं के सामने आने से धाम की ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्ता को लेकर लोगों की जिज्ञासा और बढ़ गई है। सरयू किनारे बैठे भैरवनाथ धाम स्थित एक लेख में भगवान राम के वन गमन के दौरान भैरव धाम आने का उल्लेख भी मिलता है । श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इन प्राचीन कुओं की ऐतिहासिकता और पुरातात्विक एवं धार्मिक महत्व को देखते हुए इन्हें भैरवधाम की ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संरक्षित कर श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनाया जाय। दो जिंदा कुओं की जानकारी जैसे ही स्थानीय निकाय को मिली वैसे ही नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि डॉ सुनील जायसवाल ,वरिष्ठ लिपिक मनोज सिंह व निकाय के कर्मचारी वहां पहुंच गए और इसकी जानकारी अध्यक्षा श्वेता जायसवाल को दी ,उन्होंने तत्काल ऐतिहासिक महत्व के इन कुओं को संरक्षित करने तथा जीर्णोद्धार करने एवं धरोहर व आस्था के रूप दर्शनार्थियों के लिए सुलभ कराने का निर्देश दिया ।भैरवधाम में मिले ये दो प्राचीन जिंदा कुएं आज आस्था, इतिहास और रहस्य के संगम का प्रतीक बन गए हैं। धर्मग्रंथों में वर्णित 365 कुओं और 365 यज्ञ वेदियों की मान्यता के बीच इन कुओं का सामने आना श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।
