आज़मगढ़ सिधारी थाना क्षेत्र स्थित श्री विश्वकर्मा मंदिर परिसर में 2 अप्रैल की शाम आयोजित साधारण सभा की बैठक भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मौके पर सिधारी थाने की पुलिस को पहुंचकर मामला शांत कराना पड़ा। बताया जा रहा है कि श्री विश्वकर्मा मय वंशीय पांचाल ब्राह्मण सभा की इस बैठक को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा था। आरोप है कि कुछ लोगों ने बिना सभी साधारण सदस्यों को सूचना दिए और बिना किसी वैधानिक चुनाव प्रक्रिया के खुद को अध्यक्ष, महामंत्री और अन्य पदों पर घोषित कर बैठक शुरू कर दी। इस पर सभा के अन्य आजीवन सदस्यों और पदाधिकारियों ने कड़ा विरोध जताया। महामंत्री विनोद शर्मा ने बैठक के दौरान कहा कि इस पूरे प्रकरण से संबंधित मामला चिटफंड कार्यालय, आजमगढ़ में विचाराधीन है और जब तक वहां से कमेटी का विधिवत सत्यापन एवं मान्यता नहीं मिल जाती, तब तक किसी भी पदाधिकारी की घोषणा अवैध है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित लोग मंच पर बैनर-पोस्टर लगाकर जबरन कार्यवाही करना चाहते थे, जिससे विवाद और बढ़ गया। हंगामे के बीच स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। विनोद शर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ लोगों ने यूनियन बैंक की सिविल लाइन शाखा में कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के जरिए मंदिर के खाते में अपने हस्ताक्षर प्रमाणित करा लिए। उन्होंने बैंक प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि बिना उचित जांच के खाता संचालन में बदलाव कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर के नाम पर दान राशि और किरायेदारों से जबरन वसूली की जा रही है। मामले की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने और वित्त मंत्री ने खाते के संचालन पर रोक लगवा दी है।
