पवई (आजमगढ़)। क्षेत्र की बिजली व्यवस्था का मुख्य केंद्र विद्युत उपकेंद्र पवई स्वयं बदहाली का शिकार है। लगभग 60 वर्ष पुराने इस भवन की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि बरसात के दौरान छत से लगातार पानी टपकता है, जबकि दीवारों और छत का प्लास्टर जगह-जगह से टूटकर गिर रहा है। ऐसे हालात में कर्मचारी जान जोखिम में डालकर अपनी ड्यूटी निभाने को मजबूर हैं। उपकेंद्र भवन की दीवारों में कई स्थानों पर गहरी दरारें पड़ चुकी हैं। बारिश के समय कार्यालय कक्षों में पानी भर जाता है और छत से हो रहे रिसाव के कारण विद्युत उपकरणों के साथ-साथ महत्वपूर्ण अभिलेखों के भी खराब होने का खतरा बना रहता है। कर्मचारियों का कहना है कि कई बार छत का प्लास्टर अचानक गिर चुका है, जिससे हर समय किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। कर्मचारियों के अनुसार जर्जर भवन में कार्य करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। बरसात के मौसम में छत टपकने से बिजली संबंधी कार्यों में भी परेशानी आती है। उनका कहना है कि भवन की मरम्मत अथवा नए भवन के निर्माण की मांग कई बार विभागीय अधिकारियों के समक्ष उठाई जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस उपकेंद्र से पूरे क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था संचालित होती है, उसी की यह बदहाल स्थिति विभागीय उदासीनता को दर्शाती है। यदि समय रहते भवन का पुनर्निर्माण या व्यापक मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने विभाग के उच्च अधिकारियों से शीघ्र कार्रवाई कर कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उपकेंद्र के लिए नए भवन का निर्माण कराने की मांग की है।
